शनिवार, 26 जुलाई 2008

विस्फोट



3 टिप्‍पणियां:

मिथिलेश श्रीवास्तव ने कहा…

कुछ समझ में नहीं आया

डा ’मणि ने कहा…

हाँ गरिमा जी
नमस्कार
ध्यान क्या है ....

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

जैसे विस्फोट थे उससे ज्यादा हल्ला था। न्यूज को सेनशेसन से अलग कर देखने की आदतनहीं है मीडिया की। बोलने वाले/वाली व्यर्थ में शब्दों को चबा कर खींच कर और संयुक्ताक्षर का प्रयोग कर व्यर्थ सनसनी बनाते हैं।