रविवार, 27 जुलाई 2008

अब नही तो कब?

लगातार हो रहे विस्फोटो से मन विचलित है, और कही ना कही कुछ न कर पाने कि स्थिती भी दर्द को बढावा देने मे सहयोगी बन रही है, पर मेरा ऊर्जा चिकित्सक दोस्तो से निवेदन है कि कम से कम हम इस दर्द के शिकंजे मे रहकर न जीये। चाहे आप अल्फ़ा हीलर हो, रेकी मास्टर हो या किसी भी अन्य तकनीक से हो, अगर आप दुरस्थ ऊर्जा चिकित्सा कर सकते हैं तो फिर आप कुछ तो कर ही सकते हैं।
वैसे तो यह एक नियम है कि बिना मरीज से पूछे उसका इलाज नही किया जा सकता, पर आपातकाल मे यह नियम लागू नही होता है।
वैसे मै जानती हूँ कि कई मित्र इस दिशा के तरफ अग्रसर होंगे, पर हम ये भी जानते हैं कि अकेले अकेले लडने की बजाय अगर एक साथ ऊर्जा किरणे प्रवाहित की जाये तो, वो ज्यादा काम करती है। मै चाहती हूँ कि (यकिनन आप भी चाहते होंगे) हम इस दिशा मे एक जूट होकर कुछ कर सके, अस्पताल मे डॉक्टर्स अपना काम कर रहे हैं, कम से कम हम अपने घर मे बैठे इतना तो कर ही सकते हैं, कौन जाने कि हमारी जिन्दगी से निकाले गये ये चन्द घंटे, कितनो कि जिन्दगी बचाने मे सफल हो जाये।
आप जहाँ भी है, जिस क्षेत्र मे भी है, अपने आसपास के ऊर्जा चिकित्सको की मदद लिजीये, अपने दोस्तो को एकत्रित किजिये, और अगर आप ऊर्जा चिकित्सक नही भी हैं तो भी दूसरो तक ये बात ले जाईये, साथ दिजिये उनका, जिनक सबकुछ मिटने वाला है।
कुछ देर व्यवसाय की जिन्दगी से दूर जिन्दगी के नाम करने का संकल्प लिजिये तभी वास्तव मे हमे खूद पर यकिन होगा कि वास्तव मे हम अभी इंसान हैं, संवेदनायें सिर्फ़ दिखाने के लिये नही कुछ कर दिखाने के लिये अभी जागृत हैं।
दोस्तो यह पोस्ट पढकर कॉमेन्ट देने के लिये नही, शक्ति जागृत करने के लिये पढी जाये तो दिल से खूशी होगी।

आपकी गरिमा

5 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ल ने कहा…

सुन्दर विचार। ऊर्जा चिकित्सा करें। आशा है लोगों को फ़ायदा होगा।

दिवाकर प्रताप सिंह ने कहा…

आज भारत ही नहीं पूरा विश्‍व आतंकवाद की चपेट में आ चुका है। इस तरह का घिनौना काम करने वाले इंसान कहलाने के लायक भी नहीं हैं। शर्म आती है जिस तरह से भारत में आतंकवादी हमलों में तेज़ी आई है और सुरक्षा तंत्र इसे रोक पाने में जितना असमर्थ रहा है। दोष तो व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार का है। वैसे रही-सही कसर नेतागिरी पूरा कर देती है जो ऐसी घटनाओं का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

Anil Pusadkar ने कहा…

acchi baat kahi aapne.

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

आतंक का काम ताण्डव है या मां काली का पदाघात। आपलोगों का कार्य मां सरस्वती के सतत सर्जन सा है।
अपने अपने काम में लगे रहिये!

Dev ने कहा…

Bahut sunder vichar hain.....
Badhai..
http://dev-poetry.blogspot.com/