गुरुवार, 7 जून 2007

आखिर क्यूँ?

दोस्तो कोई कहानी, कविता नही बना पायी, और ना ही कुछ लिखने का मन हो रहा था।
पर कुछ ऐसा कयी दिनो से घटित हो रहा है जिससे मन व्याकुल हो जाता है।

मेरे पास एक केस आया है जिसके संदर्भ मे लिख रही हूँ, मरीज के privacy ध्यान मे रखते हूए नाम बदल कर दे रही हूँ। मुझे कहानी लिखने का अभ्यास नही इसलिये ऐसा कोई पुट नही डाल सकी, सीधी सी सच्ची बात है, जैसे मेरा दिल गवाही दे रहा है वैसा ही लिख रही हूँ।

15 मई को बिजनौर से एक केस मिला... केस है 12 वर्षीया एक शालिनी का, मेरी यह मरीज दिन पर दिन पागल होती जा रही है।

खैर जब यह केस मुझे मिला था तो यह बताया गया कि, यह लडकी पढने मे कमजोड रही है, इस कारण अवसाद के कारण इसकी ये हालात है, तब इसके पापा से बात हूई थी, अब अवसाद दूर करना तो कोई बडी बात नही, मुझे यकिन था 2-4 दिनो मे शालिनी सामान्य होने लगेगी।

5 दिन बीत गये कुछ नही हूआ, शालिनी के पापा मुझ पर बरसे, बात थी भी, मैने बहुत यकिन से कहा था की सब ठीक हो जायेगा।
8वे दिन शालिनी की मम्मी ने रात गये फोन किया, कहने लगी इसकी बिमारी का कारण पढाई नही कुछ और है, उन्होने इतना ही बताया।

10वे फिर मम्मी ने ही फोन किया, उन्होने कहा, बेटा मेरी बेटी का इलाज जितनी जल्दी हो सके करो, और इसके पापा से बात न करना वो कुछ कहे तो कह देना मै नही कर रही हूँ। मै कुछ आगे पिछे पुछूँ उसके पहले फोन कट गया।

15वे दिन शालिनी होश मे थी, उसने जो कुछ अपनी माँ को बताया वो रिश्तो की धज्जियाँ उडा देने मे पूर्णतः समर्थ था, वैसे ये बात मुझे नही पता लगी।

3 जुन शालिनी की मम्मी को मैने कहा कि, आप जरूर कुछ छुपा रही हैं, मुझे इसके प्राभामंडल की तरंगे बहुत असमान्य लग रही हैं, बहुत जद्दोजेहद के बाद जो मुझे बताया गया-

वो है कि शालिनी के इस हालत के जिम्मेदार खुद उसके पापा हैं, उन्होने 12 वर्षीया बच्ची के साथ जो किया वो.........

शायद आगे क्या हूआ बताने की जरूरत नही है।

अब शालिनी ठीक हो रही है, पर क्या वो वास्तव मे ठीक हो पायेगी?
5 जुन को शालिनी ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी.... कारण हम समझ सकते हैं।

मैने यह बात यहा क्यूँ लिखी समझ मे नही आ रहा है, शायद एक जद्दोजेहद मेरे मन मे भी चल रही है, शालिनी के रूप मे मेरे दिल मे भी कुछ टुट सा रहा है।
आज थोडी देर पहले मैने शालिनी से बात की... उसका दर्द, उसकी भावनाये, एहसास, कही ना कही मेरे अन्दर भुचाल पैदा कर रहे हैं।

12 साल की लडकी से क्या कहूँ, मुझे याद है जब मै 12 साल की थी तो कितनी निर्भीक निडर आत्म- स्वाभिमानी थी, और यह सब सिर्फ इसलिये कि मेरे पापाजी को मै हमेशा अपना आदर्श मानती हूँ थी और रहूँगी।
मैने जो अपने पापा से direct और indirect सीख पायी, वो हमेशा मुझे प्रेरणा देती रही, पर शालिनी के साथ ऐसा कयूँ हूआ?

ऐसा नही की ऐसी कोई घटना पहली बार हूई है, पर हर बार ऐसी घटनाये मुझमे झंझावात पैदा करती है,

आखिर क्यूँ होता है ऐसा.....? क्यूँ रिश्तो की मर्यादा की इंसानियत की बलि चढाने मे लोग बाज नही आते..... क्यूँ? हर दिशा से यही सवाल गुँज रहा है...............

11 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

ऐसी विकृत मानसिकता के लोग समाज के नाम पर बदनुमा दाग हैं- क्यूँ होते हैं ऐसे लोग बस यही प्रश्न अबूझ रहता है हरदम.

Sanjeet Tripathi ने कहा…

शर्मनाक!!!

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

सब तरह के लोग हैं जहान में, शैतानो की कमी नही. जो कुछ हुआ बहुत ही शर्मनाक है

Pratik ने कहा…

यह सवाल एक इंसान का नहीं, बल्कि पूरे समाज और संस्कृति का है। लोगों की कुण्ठा विकृत रूप लेकर बाहर निकलती हैं। लेकिन क्या समाज का सारा ढांचा ही व्यक्ति के भीतर भावनाओं का दमन कर उसे विकृत रूप देने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है? मेरा मानना है कि जब तक पूरा सोशल स्ट्रक्चर नहीं बदलता, तब तक ऐसी घृणित घटनाएँ होती रहेंगी, चाहे लोगों को पता चले या न पता चले।

sajeev sarathie ने कहा…

डॉक्टर साब ऎसी घटनाएं मन झंझोद कर रख देती है

ग़रिमा ने कहा…

कभी तो शैतानो से निजात मिलेगा, इस आशा के साथ.......... शुक्रिया

गिरिराज जोशी "कविराज" ने कहा…

कहने को कुछ नहीं है...बस प्रार्थना करता हूँ कि ऐसी घटनाएँ न घटे...

mukesh ने कहा…

bus main itna hi kehna chhunga ki aap uski maammy ko or us bacchi ko samjahye jo hua usme unka koi kashoor nahi hai or wo ek sath mil kar us paapi ko saja de sakte hai or agar wo is pida se ubharne ki koshish kare to jada accha hai kyu ki kisi or ki galti ki saja hum khud ko nahi de sakte..

सिंधु श्रीधरन ने कहा…

हर बार जब ऐसी घटनाओं के बारे में सुनती हूँ, एक अजीब मायूसी छा जाती है।

ऐसे लोगों के बारे में क्या कहना। शरम आती है। क्योंकि लानत है ऐसे समाज पर जो इस तरह के विकृत मानसिकता के लोगों को पैदा करता है। माफ़ी चाहती हूँ, मैने ’इस तरह के 'लोग’ कहा। शैतान भी शायद अच्छा नाम ही होगा इनके लिए।

लेकिन इससे भी ज़्यादा दुःख इस बात पर है कि शालिनी की माँ सच्चाई जानते हुए भी चुप रहीं। इससे लगता है कि ऐसी परिस्थिती के लिए कहीं ना कहीं हम सब ज़िम्मेदार हैं।

गरिमा, अब क्या होगा? क्या इस आदमी के खिलाफ़ कोई legal charges...?

Ajay ने कहा…

Should you not be reporting this to police or shouldn't some action be taken against the father?

anuradha srivastav ने कहा…

क्या आप इस विकृति का इलाज कर सकती है ?
ताकि भविष्य में वो लडकी पुनः उस दौर से ना गुजरे ।